Thu, 08 06, 2026
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देवली गांव में पहाड़ियों पर स्थित मंदिर में विराजित है विषोद माता:

माता का प्रसिद्ध मंदिर: प्राचीन काल में यहां साढ़े तीन सौ से अधिक हुआ करते थे मंदिर, तिबारियों से निकलने पर लकवा से ग्रसित व्यक्ति ठीक होने की मान्यता

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 ग्राम पंचायत मानपुरा जागीर में स्थित देवली गांव में विषोद माता (विषुवत माता) का मंदिर स्थित है। लोक मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर हजारों साल पुराना है। इसके आसपास 350 मंदिर होने के साक्ष भी हुआ करते थे। गांव का नाम देवताओं के नाम से देवली रखा गया। इसके पास स्थित देवमंगरा का नाम भी देवताओं के नाम से रखा गया। पास में एक छोटा सा गांव एकलिंगपुरा है। जहां निवास करती भील जनजाति से एकलिंगपुरा ग्राम का नाम शिवजी को समर्पित है। यहां पर स्थित है देवली गांव के पास में विषुवत माता का मंदिर। मान्यता है कि यहां पर लकवा नामक बीमारी से ग्रसित पीड़ित व्यक्ति सही हो जाते हैं। शनिवार व रविवार को यहां काफी भक्त पहुंचते हैं। नवरात्र में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। मंदिर के पास दो बारिया बनी हुई है। बारियों से निकलने पर लकवा से ग्रसित व्यक्ति ठीक हो जाता है। माता के मंदिर के आसपास खेतों में और पहाडिय़ों के ऊपर भारी संख्या में प्राचीन मूर्तियां मिली है। पास में कुआ है, कुआ के आसपास कई मंदिरों के साक्ष्य देखे जा सकते हैं।

प्रतिमाओं का संरक्षण आवश्यक

श्रद्धालु राम रतन रेगर साटोला वाले ने कहा कि मंदिर के आसपास खेतों में, पहाड़ी पर मूर्तियों का पुरातत्व विभाग संरक्षण करें। संरक्षण के अभाव में मूर्तियां क्षतिग्रस्त हो रही है। सरकार को विशेष ध्यान देकर संरक्षण करना चाहिए। मंदिर को पर्यटन स्थल घोषित किया जाए। इस मंदिर के विकास की तरह विशेष ध्यान दिया जाए। धर्मेंद्रसिंह चूंडावत बताते हैं कि सरकार को इस मंदिर का विकास करने के लिए विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। सडक़ मार्ग से जोड़ दिया जाना चाहिए ताकि इस मंदिर का पूर्ण रूप से विकास हो सके।

सड़क का है अभाव

यहां मंदिर तक पक्की सड़क का पूर्णतया अभाव है। ग्रामीणों ने बताया कि यदि देवली से विषोद माता होते हुए एकलिंगपुरा की तरफ पक्की सडक़ बन जाए तो यह पर्यटन स्थल घोषित हो सकता है। यहां पर काफी नवाचार भी हो सकते हैं यदि सडक़ बन जाए तो आवागमन की सुविधा बढ़ सकेगी। लंबे समय से मांग चली आ रही है कि यदि इस क्षेत्र को सडक़ मार्ग से जोड़ दिया जाए तो इस क्षेत्र का विकास हो सकता है।

माताजी का मंदिर पुरानी मान्यताओं के अनुसार बहुत प्राचीन है। माता की मूर्ति जमीन से पास के खेत से निकली हुई है। जिसे ग्रामीण और क्षेत्रवासियों ने मंदिर का निर्माण कर माता की मूर्ति को स्थापित करवाया है। छोटी सादड़ी-बड़ी सादड़ी रोड के बीच में लगभग दोनों तरफ से 15 किलोमीटर की दूरी पर देवली ग्राम के पास एक किलोमीटर की दूरी पर माता का मंदिर है। इसके पास ही देवमगरा की पहाड़ी है, जहां पर खेतों में और पहाड़ी के ऊपर काफी संख्या में मूर्तियां, मंदिर, शिखर, दरवाजे आदि देखने के लिए वहां पर रखे हुए हैं।

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