आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा, रास पूर्णिमा और कोजागरी पूर्णिमा भी कहते हैं।
इस दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं यानी 16 कलाओं के साथ होता है। पृथ्वी पर चारों ओर चंद्रमा की उजास फैलती है। माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणों से अमृत वर्षा होती है, इसलिए रात्रि में चांद की रोशनी में खीर रखने की परंपरा भी है।
हालांकि इस बार 28 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण है। ग्रहण का साया होने से शरद पूर्णिमा पर चांदनी में खीर नहीं रखी जा सकेगी और ना ही खीर का भोग लगेगा।
पंडित अशोक व्यास, संकटमोचन हनुमान मंदिर के मंहत बाबूगिरी व बालाजी मंदिर के महंत आशुतोष शर्मा ने बताया कि शरद पूर्णिमा की देर रात 01:06 बजे चंद्रग्रहण लगेगा, जो मध्य रात 2:24 बजे खत्म होगा। इसका सूतक काल शाम चार बजे शुरू होगा। ऐसे में चंद्रग्रहण तक खीर बनाना निषेध रहेगा।
8 अक्टूबर को चंद्रग्रहण का समय
ग्रहण का स्पर्श रात- 1:05 बजे
ग्रहण का मध्य रात्रि 1:44 बजे
ग्रहण का मोक्ष रात्रि 2:24 बजे
ग्रहण का सूतक दोपहर 4:05 बजे
शरद पूर्णिमा तिथि शुरू : 28 अक्टूबर, शनिवार, सुबह 04:17 बजे से
शरद पूर्णिमा का समापन : 29 अक्टूबर, रविवार, 1:53 बजे रात में
कार्तिक पूर्णिमा तक किए जाएंगे दीपदान
शरद पूर्णिमा से कार्तिक मास के यम नियम, व्रत और नित्य दीपदान करने की परंपरा शुरू होती है, जो कार्तिक पूर्णिमा तक चलती है। इससे दुख दारिर्द्य का नाश होता है। शरद पूर्णिमा की निशा में ही भगवान श्रीकृष्ण ने यमुना तट पर गोपियों के साथ महारास रचाया था। ऐसे में इस दिन महारास भी होते हैं।
