प्राकृतिक सौंदर्य से सबको आकर्षित करने वाले बूंदी में जंगलों के साथ ही यहां के वेटलेंड भी समृद्ध जैवविविधता वाले हैं। जिले के अधिकांश जलस्रोतों में बारहमासी स्वच्छ जल की उपलब्धता के चलते यहां के जलाशय सदियों से विविध प्रजाति के पक्षियों सहित जलीय जीवों के लिए उत्तम आश्रय स्थल बने हुए हैं। यहां पर नदियों सहित दो दर्जन प्राकृतिक झीले, बांध व तालाब साल भर जलीय जीवों व पक्षियों के कलरव तथा अठखेलियों से आबाद रहते हैं। कई दुर्लभ प्रजाति के पक्षी भी जलस्रोतों से आकर्षित होकर यहां प्रवास पर आते हैं। यहां के वेटलेंड पर विविध प्रजातियों के कछुए सर्दियों के दिनों में टापुओं पर धूप सेकते दिखई देते है। इसके अलावा चंबल नदी स्थित जामुनिया द्वीप मगरमच्छों का प्रमुख आश्रय स्थल है, जो अब रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में संरक्षित घोषित कर दिया गया है। चंबल व ऐरू नदी में दुर्लभ प्रजाति के उदबिलाव या ओटर भी मिलते हैं। जिले के इंद्रगढ-लाखेरी क्षेत्र की चंबल व मेज नदी में घड़ियालों की जलक्रीड़ा भी लोगों को आकर्षित करती है।
मछली ठेकों ने छीने जलीय जीवों के आशियाने जिले में आने वाले प्रवासी, अन्त: प्रवासी तथा स्थानीय पक्षियों के अलावा जलीय जीवों के प्राकृतिक जलीय आवास मछली ठेकों की वजह से संकट में आ गए हैं।
अधिकांश जल स्रोतों पर मछली ठेका होने से परिंदों व जीवों के आश्रय स्थल उजड़ने लगे हैं। प्रवासी पेलिकन जैसे बड़े पक्षियों को किसी भी वेटलेंड पर उतरने ही नहीं दिया जाता हैं। यह पक्षी आकार में बड़ा होने से इसे जीवित रहने के लिए प्रतिदिन 5 से 7 किलो तक मछली की आवष्यकता होती है, जिससे मछली ठेकेदार इसे एक तालाब से दूसरे तालाब पर खदेड़ते रहते हैं। यही हाल कोरमोरेंट व अन्य परिंदों का हो रहा है। मछली जाल में कई कछुए व अन्य जलीय जीव भी उलझकर जान गंवा देते हैं।
इन जलाशयों पर रहता है जलीय जीवों का डेरा
जिले में बहने वाली ऐरू, मेज, चंबल, कुरेल, घोड़ा-पछाड़, मांगली, बाणगंगा नदियों में वर्ष भर स्वच्छ जल बहता रहता है जो साफ पानी के जलीय जीवों व पक्षियों के प्रमुख आश्रय स्थल बने हुए हैं। इसी प्रकार शहर की रियासत कालीन जैतसागर झाील, नैनवां उपखंड की कनक सागर झाील, तलवास की रतन सागर झाील, हिण्डोली की रामसागर स्वच्छ व मीठे पानी की झीलें है। साथ ही हिंडोली क्षेत्र में मेज नदी पर बना जिले का सबसे बड़ा गुढ़ा बांध, नारायणपुर बांध, तालेड़ा का बरधा, भीमलत-अभयपुरा, गरड़दा बांध व रामगढ़-विषधारी अभयारण्य का झरबंधा जिले के प्रमुख वेटलेंड है।
टाइगर रिजर्व व वन क्षेत्रों के बांध भी सुरक्षित नहीं
जिले में हाल ही में अस्तित्व में आए टाइगर रिजर्व क्षेत्र के कोर प्रशासनिक नियंत्रण वाले वन क्षेत्र के बांध भी मछली ठेके की जद में हैं। वन्यजीव प्रेमियों की मांग के बावजूद वन विभाग व प्रशासन ने इन जलाशयों पर मछली ठेका बंद नहीं करवाया है। टाइगर रिजर्व क्षेत्र के कोर क्षेत्र की भोपतपुरा रेंज के वन क्षेत्र में आने वाले भीमलत व अभयपुरा बांधों पर मछली ठेका चल रहा है, जबकि यह क्षेत्र इको-टुरिज्म व पक्षियों का प्रमुख केंद्र हैं।
