हिण्डोली के ऐतिहासिक प्रसिद्ध स्थल त्रिवेणी धाम रखरखाव के अभाव में आभा को रहा है। यहां का विकास होने पर पर्यटक की विपुल संभावना है।
त्रिवेणी संगम पर कस्बे की पुरानी बसावट में तीन मंदिरों का ऐसा संगम है जो शायद संपूर्ण देश में दुर्लभ है। बीच में स्तंभ तीनों ओर विशाल मंदिर होने से इस स्थान को त्रिवेणी कहते हैं।
यहां पर चारभुजानाथ, लक्ष्मीनाथ एवं कल्याणरायजी के मंदिर तीन अलग-अलग दिशाओं में हैं, लेकिन सबका मिलन मध्य में स्थित गरुड़ स्तंभ पर होता है। गरुड़ स्तंभ पर गरुड़ अवतार की प्रतिमा स्तंभ के ऊपरी भाग पर स्थित है। रात्रि के समय यहां लगी सर्च लाइट की रोशनी में यहां की सुंदरता को चार चांद लग जाते हैं। दो दशक पूर्व अधिकांशत: सभा एवं धार्मिक उत्सव यहीं पर आयोजित होते थे। गरुड़ जी की प्रतिमा दसवीं शताब्दी की बताई गई है। लक्ष्मीनाथ मंदिर का निर्माण प्रताप सिंह ने संवत 1686 में करवाया था। आज भी यह मंदिर अपनी स्थापत्य मूर्ति कला को समेटे हुए है। तीनों मंदिरों की जो स्थापत्य कला बहुत ही आकर्षक एवम अद्भुत हैं,।
संरक्षण की है दरकार
त्रिवेणीधाम बहुत ही देखने लायक स्थल है, लेकिन वर्तमान में इनका संरक्षण नहीं हो पाने के कारण पत्थर दरक रहे हैं। जिससे तीनों मंदिरों को विकास की काफी दरकार है। त्रिवेणी धाम विकास समिति द्वारा प्रतिवर्ष मंदिरों के पत्थरों पर जो झाड़-झंझाड़ उग जाते है। उसको कीटनाशक दवा द्वारा खरपतवार को नष्ट किया जाता है, लेकिन यह जो खरपतवार बारिश में बार-बार उग जाती है। कस्बे के लोगों का कहना है कि इस पर्यटक स्थल में शामिल किया जाए तो यह देखने लायक स्थल बन सकता है।
विकास समिति के प्रयास जारी
हिण्डोली. मंदिरों के संरक्षण एवं सौंदर्यकरण के लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं, दिनों दिन समिति द्वारा यहां पर तीनों मंदिरों को सुंदर बनाने के लिए आकर्षक रोशनी से सजावट भी की गई है। मंदिरों के संरक्षण के लिए राज्य सरकार एवं यहां की जनप्रतिनिधि एवं पर्यटन मंत्री मंत्री से भी मांग की गई थी। इन मंदिरों के संरक्षण के लिए एवं इनके सौंदर्यकरण के लिए पर्यटन विभाग द्वारा इनका कायाकल्प किया जाना चाहिए।
त्रिवेणी धाम को विकास की दरकार है,तीनों मंदिरों के रखरखाव हो जाए वह फसाड लाइट लगे तो देश-विदेश के सैलानी पूर्व की भांति यहां फिर आकर्षित होंगे।
चिराग नकल, अशोक जोशी, सदस्य त्रिवेणी धाम विकास समिति
त्रिवेणी धाम में दक्षिण की झलक नजर आते हैं। यहां पर गरुड़ स्तंभ के तीनों और झांकते विशाल काय मंदिर सौंदर्य के प्रतीक है। कस्बे की पुरानी बसावट पहाड़ी पर होने से यहां पर मुख्य आयोजन होते थे।
मनोज पाराशर , विनीत व्यास, सदस्य
तीन दशक पहले यहां पर विदेशी आते थे, लेकिन रखरखाव के अभाव में आवक कम होती गई।
विकास लक्षकार, मुकेश गौतम
