दीपों का पर्व दीपोत्सव इस बार 11 नवंबर से 15 नवंबर तक मनाया जाएगा। दीपावली का पर्व धनतेरस से प्रारंभ होकर भैया दोज तक चलता है। इस बार 11 नवंबर को धनतेरस से यह पर्व प्रारंभ होगा। दीपावली के अगले दिन अन्नकूट मनाने व गोवर्धन पूजा करने की परंपरा है लेकिन इस साल दीपावली के एक दिन बाद अन्नकूट व गोवर्धन पूजा होगी।
स्वामी सुदर्शनाचार्य ने बताया कि इस बार अधिक मास के चलते तिथियों में घटत बढ़त के चलते पर्व भी आगे पीछे हो गए हैं। 11 नवंबर को धनतेरस मनाया जाएगा। इस दिन दीपक प्रज्वलित किया जाएगा। 12 नवंबर को छोटी दीपावली, रूप चौदस के साथ बड़ी दीपावली भी मनाई जाएगी। दीपावली के दिन लक्ष्मी गणेश और कुबेर की पूजा की जाएगी। 13 नवंबर को सर्वपितृ अमावस्या व सोमवती अमावस्या मनाई जाएगी। इस दिन पितरों के निमित्त दान और पितृ तर्पण किया जाता है। 14 नवंबर को अन्नकूट व गोवर्धन पूजा होगी। इस बार अमावस्या तिथि होने के कारण एक दिन बाद अन्नकूट व गोवर्धन पूजा होगी। 15 नवंबर को भाई दूज मनाई जाएगी।
खुशियों का पर्व है दीपावली
दीपावली बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान राम चौदह वर्ष का वनवास पूरा कर लंका के राजा रावण का वध करने के बाद भाई लक्ष्मण, पत्नी सीता के साथ अयोध्या वापस लौटे थे। उनके आगमन की खुशी में घरों में दीपक जलाए जाते हैं। स्वागत के लिए घरों में साफ सफाई की जाती है। नए कपडे़ पहने जाते हैं।
होने लगी अन्नकूट की तैयारी
मंदिरों में अन्नकूट का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए विभिन्न मंदिरों, संगठनों व संस्थाओं ने तैयारी शुरू कर दी है। इस दिन अन्नकूट बनाकर भगवान को भोग लगाकर प्रसाद का वितरण किया जाता है। ब्राह्माण सभा की ओर से 13 नवंबर को दीपावली मिलन एवं अन्नकूट प्रसादी का आयोजन किया जाएगा।
