दीपावली नजदीक है, लेकिन देवस्थान विभाग की ओर से बडे मंदिरों के लिए अभी तक सहायता राशि नहीं मिली है। देवस्थान विभाग की लेटलतीफी के चलते साल में एक बार मिलने वाली इस राशि के लिए भी भगवान को इंतजार करना पड़ रहा है। इस वित्तीय वर्ष का बजट अप्रेल में स्वीकृत हो चुका है, लेकिन इसके बाद भी खातों में राशि नहीं आई है। वर्तमान में देवीजी महाराज मंदिर सिटी पैलेस, महल चौक में बृजनंदनजी महाराज, बाला किला में रूपेश्वर प्रतापेश्वर सहित अन्य बडे मंदिर हैं जिनको इस साल अभी तक बजट नहीं मिला है। इन मंदिरों में दीपावली की रोशनी व सजावट में ही हजारों का खर्च है।
भोग खर्च उठा रहे हैं श्रद्धालु : देवस्थान विभाग के बडे़ मंदिरों को पांच हजार से अधिक का बजट वार्षिक दिया जाता है, लेकिन इस बार यह राशि भगवान के खाते में नहीं आई है। इस राशि से ही भगवान का दीया-बाती, पोशाक व प्रसाद का इंतजाम किया जाता है। पांच माह बाद भी यह राशि नहीं मिलने से मंदिरों के पुजारियों को श्रद्धालुओं की सहायता से भगवान के लिए भोग का इंतजाम करना पड़ रहा है। इधर, दीपावली पर मंदिरों में बिजली की रोशनी व देशी घी के दीये जलाए जाते हैं। बजट नहीं मिलने से इसके लिए पुजारियों को जेब से ही राशि लगानी होगी।
एक दशक से भोग खर्च की राशि नहीं बढ़ी
बडे़ मंदिरों में विराजमान प्रतिमाओं के भोग खर्च के लिए दी जानी जाने वाली राशि पिछले एक दशक से नहीं बढ़ाई गई है। पंडितों का कहना है कि वर्तमान में मंदिरों के लिए जो राशि दी जा रही है वह महंगाई के इस दौर में बहुत कम है। यह राशि साल में एक बार दी जाती है। महीने के अनुसार एक माह का 500 से 600 रुपए का बजट मिलता है। इस राशि में देशी घी की बत्ती भी नहीं जल पाती है।
