आधुनिकता की इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में आज हर कोई मनोरंजन के लिए सोशल मीडिया व ऑनलाइन का सहारा ले रहा है। सभी धार्मिक आयोजन व कार्यक्रमों में भी लोग ऑनलाइन ही कार्यक्रम देखना पसंद करते हैं लेकिन रींगस कस्बे में श्रीसूर्य मंडल के तत्वावधान में आयोजित रामलीला को लेकर 47 साल से आज भी लोगों में वैसा ही क्रेज देखने को मिल रहा है। रामलीला देखने के लिए हजारों की भीड़ आज भी शाम होते ही आजाद चौक की तरफ उमड़ पड़ती है। कस्बे की रामलीला में सबसे रोमांचक हनुमान उड़ान होती है जो पूरे प्रदेश की एकमात्र हनुमान उड़ान है जिसमें हनुमानजी केवल रस्सी के सहारे संजीवनी बूटी लेकर आते हैं। हनुमान उड़ान के दिन रामलीला मैदान आजाद चौक में लोगों को पैर रखने की जगह भी नहीं मिल पाती है। रामलीला में दर्जनों पात्र तो ऐसे हैं जो रामलीला के प्रारंभ से आज 47 साल बाद भी अपना किरदार निभाते आ रहे हैं।
चाय की दुकान के छप्पर से हुई थी मंडल की स्थापना
सूर्य मंडल अध्यक्ष हरिप्रसाद बलौदा ने बताया कि कस्बे में रामलीला का आयोजन करने वाले मंडल की स्थापना कस्बे के युवाओं ने नवंबर 1976 में सिटी बस स्टैंड पर प्रभातीलाल बागड़ा की चाय की दुकान के छप्पर में सामाजिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए की थी। समोद हनुमानजी तक साइकिल यात्रा निकालकर मंडल का शुभारंभ किया था। सूर्य मंडल ने धार्मिक नाटकों रूप- बसंत, राजा भरतरी, अमर सिंह राठौड़, राजा हरिश्चंद्र, भक्त पूरणमल के नाटक के माध्यम से सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शुभारंभ किया था। उन दिनों यह नाटक ही लोगों के मनोरंजन का मुख्य साधन हुआ करते थे।
लोग कई किमी दूर से ऊंट गाड़ी व बैल गाड़ियों में बैठकर नाटक देखने के लिए रींगस आया करते थे। नाटकों के सफल आयोजन के बाद 1976 में ही पहली बार रामलीला का मंचन किया गया था। रामलीला मंचन के लिए सूर्य मंडल के पहले अध्यक्ष गोगराज शर्मा गढ़भोपजी कांवट कस्बे के रामलीला मंडल से दो पर्दे उधार लेकर आए थे। इन्हीं दो पर्दों पर पूरी रामलीला का मंचन किया गया था। आज सूर्य मंडल की रामलीला के लिए जन सहयोग से सारे साजों सामान स्वयं के उपलब्ध हो गए हैं।
एक दर्जन सदस्य आज भी दे रहे हैं सेवाएं
रामलीला में गजानंद जोशी, रामगोपाल बींवाल, हरिप्रसाद बलौदा, निरंजन शर्मा, रामवतार कुमावत, चिरंजीलाल डाकवाला, दामोदर तिवाड़ी, कैलाश छीपा, श्याम सुंदर चुलेट सहित अनेक सदस्य मंडल की स्थापना 1976 से ही लगातार अपनी सेवाएं देते आ रहे हैं। हरिप्रसाद बलौदा 47 साल से हनुमानजी का किरदार निभाते आ रहे हैं।
68 वर्षीय बलौदा तीन मंजिला इमारत से अकेली रस्सी के सहारे हनुमान उड़ान करके संजीवनी बूटी लेकर आते हैं।
इस उड़ान को देखने के लिए आस पास के दर्जनों गांवों के हजारों लोगों की भीड़ उमड़ती है।
