Thu, 08 06, 2026
देश

चंद्र ग्रहण के चलते शाम को नहीं हुई भगवान की पूजा, नहीं लगा खीर का भोग:

मंदिरों के पट शाम को रहे बंद, बाहर से ही दर्शन कर लौटे श्रद्धालु

post-img

शरद पूर्णिमा पर शनिवार को साल का आखिरी चंद्र ग्रहण रहा। इस ग्रहण का सूतक 28 अक्टूबर की शाम 4 बज कर 5 मिनट से प्रारम्भ हुआ। इसके चलते मंदिरों में सुबह की पूजा अर्चना तो हुई लेकिन शाम 4 बजे मंदिर के पट लगा दिए गए और मंदिरों में शाम की पूजा अर्चना नहीं हुई। चंद्र ग्रहण रात्रि को 1 बजकर 5 मिनट से 2 बजकर 30 मिनट तक रहा।

ग्रहण के समापन पर रविवार सुबह मंदिरों में भगवान की प्रतिमाओं का अभिषेक कर नए वस्त्र दान किए गए। गंगाजल से अभिषेक किया गया। शहर के त्रिपोलिया मंदिर, जगन्नाथ मंदिर, वेंकटेश बालाजी धाम, गोविंद देवजी मंदिर, बलदाऊजी मंदिर सहित अन्य मंदिरों में पट बंद रहे और पूजा अर्चना नहीं हुई।

इधर. सूतक के दौरान घरों में खाद्य वस्तुओं में डाब डालकर ग्रहण से बचाव किया गया। ग्रहण का समापन होने पर रविवार की सुबह वस्त्र, अन्न व दक्षिणा आदि देकर दान पुण्य किया गया।

शरद पूर्णिमा पर शनिवार की शाम चार बजे बाद सूतक लगने पर शहर के कुछ मंदिरों में परंपरा निभाते हुए सुबह ही भगवान को खीर का भोग लगा दिया गया। इसके साथ ही कुछ मंदिरों में एक दिन पूर्व शुक्रवार रात को ही भगवान को खीर का भोग लगाकर शरद पूर्णिमा मनाई गई।

Related Post