आधुनिक युग की चकाचौंध में भले ही इलेक्ट्रिक व फैंसी रोशनी का प्रचलन बढ़ गया है, लेकिन ग्रामीण परिवेश में अभी भी माटी के दीयों से ही घर आंगन को रोशन कर परम्परागत रूप से दीपावली मनाई जाती है। यही कारण है कि सीमान्त क्षेत्र फलोदी में अभी भी माटी के दीयों का प्रचलन बना हुआ है। शारदीय नवरात्रि के साथ ही मौसम में घुल रही गुलाबी सर्दी के बाद अब मटकी का निर्माण बंद कर दिया है, लेकिन दीपावली की सीजन को देखते हुए माटी के दीपक बनाने में जुट गए है और सामान्य दीयों के साथ विभिन्न डिजायनों के दीयों का निर्माण इन दिनों किया जा रहा है। मिट्टी को चाक से आकार देकर कुम्भकार इन दिनों बड़ी संख्यां में दीयों का निर्माण कर रहे है।
पांच लाख दीयों से रोशन होगा जिला
फलोदी जिला बनने के बाद इस बार पहली बार दीपावली आ रही है। ऐसे में जिले की पहली दीपावली परम्परागत व पुरातन संस्कृति के अनुरूप मनाई जाएगी। इसके लिए कुम्भकारों ने भी इस सीजन में मांग के अनुरूप माटी के दीयों को तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। गौरतलब है कि दीपक बनाने वाले कुम्भकारों की ओर से हर साल दो से तीन लाख माटी के दीयों का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन इस बार जिला गठन के बाद पहली दीपावली होने और विधानसभा चुनाव होने के चलते कुम्भकारों ने दीयों का दो से तीन गुना अधिक स्टॉक तैयार किया है। कुम्भकार शिवप्रताप ने बताया कि चुनावी सीजन में मंदिरों व चौराहों पर राजनीति से जुड़े व्यक्तियों की ओर से विशेष सजावट की जाएगी। जिसके चलते इस दीपावली पर दीयों की अधिकतम बिकवाली होने की उम्मीद के चलते अलग अलग जगहों पर करीब पांच लाख के करीब दीयों का निर्माण किया जा रहा है। फलोदी में निर्मित दीपक की मांग जोधपुर शहर व ग्रामीण अंचल में भी ज्यादा होती है।
