Thu, 08 06, 2026
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नवरात्र विशेष: श्रद्धालुओं को लुभाती है पाले माता मंदिर की बनावट:

कई गांवों से पहुंची पदयात्राएं...

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बैपलावत वंश की कुलदेवी पाले माता मंदिर पर मंगलवार को जयपुर, दौसा व अलवर समेत कई जिलों से करीब एक दर्जन गांवों की पैदल यात्राओं का संगम हुआ। पदयात्रियों के स्वागत एवं आवभगत के लिए पूरे पापड़दा गांव के बैपलावत वंश के मीणा जाति के लोग तैयारियों में जुट रहे। बुजुर्गों का कहना है कि पूरे देश में जहां - जहां भी बैपलावत वंश के मीणा जाति के लोग निवास करते हैं उनका उदगम पापड़दा से ही माना जाता है। यहां पर करीब एक हजार वर्ष पुराना बैपलावत वंश की कुल देवी का मंदिर था। पिछले वर्षों इस मंदिर का जीर्णोद्वार कर विशाल मंदिर बनाया गया है। स्थापत्य कला के बेजोड़ नमूने इस मंदिर को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। जयपुर जिले सहित आसपास के कई गांवों से बैपलावत वंश के मीणा जाति लोगों की हर वर्ष पैदलयात्राएं आती है। महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों से भी लोग कुल देवी के मंदिर में आते हैं।

चारों कोनों में मंदिर: कस्बे के पाले माता के इस मंदिर में माता में खाटूश्यामजी व मीन भगवान सहित कई देवी देवताओं की भी प्रतिमाएं हैं। कस्बे में होने वाले किसी भी धार्मिक की शुरुआत इसी मंदिर से होती है। कस्बे के चारों कोनों में बालाजी मंदिर एवं उनमें शिवालय स्थित है। इन मंदिरों का नाम भी अलग-अलग है कस्बे के उत्तरी दिशा में वीर हनुमान मंदिर, पश्चिम दिशा में बड़ा बालाजी मंदिर, पूर्वी दिशा में के बड़े वाले हनुमानजी व दक्षिण में छतरी वाले हनुमानजी मंदिर है। माता मंदिर के सामने भी एक हनुमान मंदिर है, वहीं चौथ माता मंदिर के सामने दुश्मन पछाड़ हनुमान मंदिर है।

 

 

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