Thu, 08 06, 2026
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बंगाल की मिट्टी से कारीगरों ने किया मां दुर्गा की प्रतिमा निर्माण:

बंगाली रीति-रिवाज से हो रही मां की आराधना

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शक्ति संचय के महापर्व नवरात्रि में बांसवाड़ा में पूर्वी व पश्चिमी भारत की संस्कृतियों का सेतु बंधा है। जिले में निवासरत बंगाली समाज की ओर से दुर्गा पूजा महोत्सव के अन्तर्गत मां दुर्गा सहित अन्य देवी-देवताओं की पश्चिम बंगाल की तरह ही प्रतिमाओं का निर्माण कराकर स्थापना की है। प्रतिदिन यहां बंगाली रीति-रिवाज के अनुसार मातारानी की पूजा-अर्चना हो रही है।
बांसवाड़ा में नवरात्रि की चहुंओर धूम मची है। शहर के देवी मंदिरों में पूजन-अनुष्ठान हो रहे हैं। वहीं बंगाली समाज की ओर से पृथ्वी क्लब में बंगाली मूर्तिकला का दिग्दर्शन हो रहा है। जिला मुख्यालय व देहात में निवासरत बंगाली समाजजनों ने नवरात्रि की षष्ठी को दुर्गा पूजा महोत्सव का शुभारंभ किया। इसके बाद प्रतिदिन यहां मातारानी के बंगाली रीति अनुसार अनुष्ठान किए जा रहे हैं, जिसमें पुरुषों, महिलाओं और युवा वर्ग की सहभागिता दिखाई पड़ रही है। वहीं शहरवासी भी यहां पहुंचकर मातारानी के दर्शन कर रहे हैं।
नवरात्रि से पहले बुलाए कारीगर
बंगाली समाज ने महोत्सव के लिए नवरात्रि के पहले ही यहां पश्चिम बंगाल से कारीगर बुलवाए। पश्चिम बंगाल की मिट्टी से ही मां दुर्गा की दस फीट ऊंची तथा सरस्वती, लक्ष्मी, गणेश, कार्तिकेय की प्रतिमाएं स्थापित की हैं। यहां प्रतिदिन बंगाली परम्परा के अनुसार ही मातारानी की पूजा-अर्चना हो रही है।
आज सिंदूर खेला व विसर्जन
दुर्गा पूजा समिति के प्रवक्ता तापस दे सरकार ने बताया कि महाअष्टमी पर कोलकाता से आए पं. गोपाल आचार्य के सानिध्य में नवचंडी पाठ किया। मातारानी को 108 कमल पुष्पों की माला व सवामण खीर का प्रसाद अर्पित किया। रात्रि में धनुची आरती के बाद गरबा का आयोजन हुआ। सोमवार को महानवमी पर 108 बिल्व पत्र से हवन के बाद 108 दीपों से आरती की गई। मंगलवार को सुबह शस्त्र पूजा के बाद महिलाओं की ओर से सिंदूर खेला आयोजन होगा। दोपहर बाद प्रतिमाओं की शोभायात्रा निकाली जाएगी और डायलाब तालाब में विसर्जन किया जाएगा।

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