Thu, 08 06, 2026
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बेटे की तकलीफ बनी नवाचार की प्रेरणा:

बेटे के दर्द को बनाया प्रेरणा: साइकोलॉजिस्ट नेहा सोलंकी ने दिव्यांग बच्चों के लिए बनाई विशेष कुर्सी, राष्ट्रपति करेंगी सम्मानित

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पाली। कहते हैं कि एक मां अपने बच्चे का दर्द सबसे गहराई से महसूस करती है। पाली जिले के मारवाड़ जंक्शन क्षेत्र के हेमलियावास खुर्द निवासी और वर्तमान में जोधपुर में रह रहीं साइकोलॉजिस्ट नेहा सोलंकी ने अपने बेटे की पीड़ा को ही अपनी ताकत बना लिया। उन्होंने सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित बच्चों के लिए ऐसी विशेष कुर्सी विकसित की, जिस पर बच्चे बिना किसी सहारे के सुरक्षित और आरामदायक तरीके से बैठ सकते हैं। उनके इस नवाचार ने न केवल उनके बेटे का जीवन आसान बनाया, बल्कि देशभर के विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए नई उम्मीद भी जगाई है।

नेहा सोलंकी के इस अभिनव कार्य को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन ने वर्ष 2026 के 'ग्रासरूट्स इनोवेटर रिकग्निशन' के लिए उनका चयन किया है। पूरे देश से चयनित 26 नवाचारकर्ताओं में शामिल नेहा को 31 जुलाई 2026 को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सम्मानित करेंगी।

बेटे की बीमारी बनी बदलाव की प्रेरणा

जयपुर निवासी नेहा सोलंकी का विवाह करीब 15 वर्ष पहले हेमलियावास खुर्द निवासी डॉ. अभिषेक भाटी से हुआ था। बेटे के जन्म से परिवार में खुशियां आईं, लेकिन छह माह बाद पता चला कि वह सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित है। इस बीमारी में मस्तिष्क का विकास तो होता है, लेकिन शरीर की गतिविधियों पर पूरा नियंत्रण नहीं रह पाता, जिससे बच्चे को बैठने, उठने और संतुलन बनाए रखने में कठिनाई होती है।

नेहा बताती हैं कि बेटे की तकलीफ ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया और तभी उन्होंने ऐसे बच्चों के लिए कुछ नया करने का संकल्प लिया।

स्कूलों के इनकार ने दिया नवाचार का विचार

वर्ष 2023 में बेटे के स्कूल में प्रवेश के लिए कई निजी विद्यालयों के चक्कर लगाने पड़े, लेकिन अधिकांश स्कूलों ने उसकी शारीरिक स्थिति का हवाला देते हुए प्रवेश देने से इनकार कर दिया। अंततः एक स्कूल ने शर्त रखी कि यदि बच्चा सुरक्षित तरीके से बैठ सके तो उसे प्रवेश दिया जाएगा।

यहीं से नेहा को विशेष कुर्सी बनाने का विचार आया, ताकि सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित बच्चे सामान्य स्कूलों में भी पढ़ाई कर सकें।

9 महीने की मेहनत से तैयार हुई विशेष कुर्सी

करीब 9 महीने के शोध और निरंतर प्रयास के बाद नेहा ने ऐसी विशेष कुर्सी तैयार की, जिसमें बच्चे के शरीर को आवश्यक सहारा मिलता है और वह बिना किसी अतिरिक्त सहायता के सुरक्षित बैठ सकता है। इससे गिरने का खतरा भी काफी कम हो जाता है।

इस कुर्सी की मदद से उनका 10 वर्षीय बेटा आज सामान्य बच्चों के साथ स्कूल में पढ़ाई कर रहा है। यह विशेष कुर्सी 3 से 12 वर्ष तक के बच्चों के लिए उपयोगी है और इसका पेटेंट भारत सरकार से भी प्राप्त हो चुका है।

विशेष बच्चों के लिए बनाई कंपनी

नेहा सोलंकी ने अपने अनुभव को समाजसेवा का माध्यम बनाते हुए एक कंपनी की स्थापना की, जो विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए सहायक उपकरण विकसित करती है। अब तक वह दो प्रकार की विशेष कुर्सियां तैयार कर चुकी हैं। इसके अलावा ऐसे कई अन्य उपकरणों पर भी कार्य किया जा रहा है, जिनकी मदद से दिव्यांग बच्चे दैनिक जीवन के कार्य अधिक आत्मनिर्भर होकर कर सकें।

उनके पति डॉ. अभिषेक भाटी एक सामाजिक संस्था का संचालन करते हैं, जिसके माध्यम से नशा मुक्ति केंद्र भी संचालित किया जाता है।

नेहा सोलंकी की यह उपलब्धि न केवल राजस्थान, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा का विषय है। यह साबित करती है कि संवेदनशील सोच और दृढ़ संकल्प से व्यक्तिगत पीड़ा को समाज के लिए बड़े बदलाव में बदला जा सकता है।

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