Thu, 08 06, 2026
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अब लग्न पत्रिका भी हुई हाइटेक, कम्प्यूटर पर सारा डाटा:

देवउठनी एकादशी को लेकर घरों में शुरू हुई मांगलिक तैयारियां

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बदलते परिवेश में अब लग्न पत्रिका, व पीली चिट्ठी भी आधुनिक हो गई है पहले जहां पीली चिट्ठी को हाथों से लिखा जाता था। वहीं अब यह भी कंप्यूटराइज्ड हो गई है। आज भले ही सोशल मीडिया के माध्यम से मांगलिक कार्यक्रमों के लिए निमंत्रण भेजे जाते हैं लेकिन शादी विवाह पीली चिट्ठी और लग्न पत्रिका बने बिना प्रारंभ नहीं होते देवउठनी एकादशी से प्रारंभ होने वाली शादी की शहनाइयों के लिए देहात क्षेत्र में अभी से मांगलिक गीतों की धुन सुनाई देने लगी है। वैवाहिक संबंध तय होने के बाद सबसे पहले वर वधु दोनों पक्ष विवाह की तिथि लग्न पाणिग्रहण संस्कार की घड़ी और समय विद्वान आचार्य से तय करवाते हैं। इसके बाद विवाह से पूर्व पीली चिट्ठी पीतपत्र भेजी जाती है पीले कागज पर हाथ से लिखी जाने वाली इस पीली चिट्ठी में विवाह की तारीख व लग्न की तारीख होती थी लेकिन बदलते परिवेश ने इस हाथ से लिखी चिट्ठी का रूप छपी हुई पीली चिठ्ठी ने ले लिया है।

फोटोग्राफी स्टेज के कारण तय समय पर नहीं होते फेरे

अधिकांश विवाह फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी और स्टेज के कारण तय समय और घड़ी से नहीं हो पाते। आचार्य महेश शास्त्री के अनुसार वर वधु दोनों पक्ष ही चाहते हैं कि पाणिग्रहण संस्कार की रस्म कुछ ही समय में निपट जाए जबकि विवाह के सात वचन आदि विधि विधान से नहीं कराया जाए तो विवाह में आगे परेशानी आना स्वाभाविक है।

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