भारत के अधिकांश भाग में विक्रम संवत के अश्विन माह के कृष्ण पक्ष(श्राद्ध पक्ष) के अंतिम दिनों में भगवान श्रीराम के जीवन पर आधारित रामलीला के मंचन का दौर शुरू हो जाता है और यह भगवान राम द्वारा रावण का वध करने के पर्व दशहरा विजयदशमी के दिन संपन्न होती है। हनुमानगढ़ जिले में स्थित संगरिया में रामलीला मंचन का इतिहास रियासत कालीन समय का है। यहां मंचन भारत की स्वतंत्रता से पूर्व शुरू हो गया था तथा संभवत यह पूरे बीकानेर संभाग की सबसे प्राचीन रामलीला में से एक है। वर्तमान में श्रीजुबली राम नाटक समिति द्वारा रामलीला मंचन की शुरुआत बीकानेर रियासत के महाराजा गंगा सिंह के राज्य की बागडोर संभालने की 50वीं वर्षगांठ पर पूरी रियासत में हुए आयोजन के तहत की गई थी महाराजा गंगा सिंह जी का जन्म 13 अक्टूबर 1880 को हुआ था उनके द्वारा बीकानेर रियासत का शासन 1888 में मात्र आठ वर्ष की छोटी आयु में संभाल लिया गया था उनकी मृत्यु दो फरवरी 1943 को हो गई थी। वर्ष 1938 में उनके 50 वर्ष के शासन को गोल्डन जुबली वर्ष के रूप में मनाया गया था इस अवसर पर संगरिया में श्रीजुबली राम नाटक समिति का गठन करके सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया था। 1939 से श्रीजुबली डायमेट्रिक क्लब के मंच से रामलीला का मंचन होना शुरू किया गया व कुछ समय बाद डायमेट्रिक का नाम बदल कर श्री जुबली राम नाटक क्लब में परिवर्तित कर दिया गया। जो वर्तमान में सोसायटी पंजीयन के बाद श्री जुबली राम नाटक समिति के नाम से संचालित हो रहा है।
पूरे परिवार का रहता था योगदान
स्थापना के समय से ही इसके आयोजन में अनेक परिवार की सक्रिय भूमिका रहती थी। इसमें प्रतिष्ठित जीवन राम वर्मा परिवार के अधिकांश सदस्यों ने रामलीला के विभिन्न पात्रों का अभिनय लंबे समय तक निभाया। पूर्व नगरपालिकाध्यक्ष स्वर्गीय मनीराम वर्मा के 83 वर्षीय पुत्र केवल राम वर्मा ने अभिनय में परिवार की पृष्ठभूमि के बारे में बताते हुए कहा कि सन 1950 के दशक में उन्होंने लक्ष्मण की भूमिका से रामलीला में मंचन प्रारंभ किया था व करीब तीन-साढे तीन दशक तक अनेक पात्रों की भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि वह वर्तमान में भी रामलीला में बतौर दर्शन नियमित शामिल होते हैं। रामलीला आयोजन में मिट्ठन लाल सोनी परिवार के अधिकांश सदस्यों ने भी विभिन्न पात्रों की भूमिका निभाई। इसके अतिरिक्त शहर के अनेक परिवारों की ओर से विभिन्न पात्रों का अभिनय नियमित रूप से किया गया।
अनेक बार बदला स्थान
संगरिया में रामलीला के मंचन की शुरुआत रियासत कालीन उत्तरी द्वार के नजदीक धर्मचंद जैन की दुकान की ओर धान मंडी पिड़ पर हुआ करता था उसके पश्चात यह आयोजन कुछ समय बाद दक्षिणी दरवाजे के मुंडावाला परिवार की दुकान के नजदीक होने लगा वहां से बदलकर यह दक्षिण दरवाजे के नजदीकी सोमानी भवन के पिड़ की और होने लगा। निरंतर हो रहे आयोजन के चलते नगर पालिका द्वारा रंगमंच के लिए जुबली राम नाटक समिति को स्थान भी आवंटित किया गया। शहर के विकास के साथ रामलीला का मंचन परकोटे से बाहर निकलकर नई धान मंडी में विभिन्न स्थानों पर आयोजित की गई। धान मंडी के जनरल मार्केट क्षेत्र को अभी भी रामलीला मैदान ही कहा जाता है। वर्तमान में करीब डेढ दशक से यह आयोजन ऋषि आश्रम चौक के मध्य किया जा रहा है।
दशहरा पर्व का भी हो रहा है आयोजन
श्री जुबली राम नाटक समिति के अध्यक्ष आनंद गोयल व पूर्व अध्यक्ष विनोद मोदी ने बताया कि संस्था द्वारा करीब चार दशक से दशहरा मेला का आयोजन भी किया जा रहा है जिसके तहत रावण मेघनाथ कुंभकरण के पुतले जलाए जाते हैं। मनीष बंसल व प्रवीण भादु ने बताया कि इस बार भी यह आयोजन बिड़ला मिल मैदान में आयोजित किया जाएगा।
अभी भी होता है नाटक का आयोजन
रामलीला के मंच पर प्रतिवर्ष रामलीला के साथ.साथ ड्रामा का आयोजन भी किया जाता है जिसके तहत हरिश्चंद्र तारामती, लव कुश, सुहागिन, रूप बसंत सहित अनेक नाटक का मंचन किया जाता है। चूंकि समिति के आयोजन की शुरुआत डायमेट्रिक क्लब के रूप में की गई थी उसी को जीवंत बनाए रखने के लिए प्रतिवर्ष राजतिलक संध्या को अधिकांशत एक ड्रामा आयोजन किया जाता है।
