Thu, 08 06, 2026
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पुतले लेने लगे आकार, दशहरे से 4 दिन पहले रावण होगा तैयार:

मुरैना से आए कारीगरों का दल कर रहा पुतलों का निर्माण

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असत्य पर सत्य की जीत का पर्व दशहरा अभी 11 दिन दूर है, लेकिन बुराई के प्रतीक के तौर पर दहन किए जाने वाले रावण, कुम्भकरण और मेघनाद के पुतले आकार लेने लगे हैं। मध्यप्रदेश के मुरैना के कारीगरों का दल बीते सप्ताह से पुतलों के निर्माण मंु जुटा है। ऐसे में इस बार दशहरा से करीब 4 दिन पहले रावण और अन्य पुतले बनकर तैयार हो जाएंगे। कोरोना काल के दो वर्ष के अंतराल के बाद नगर परिषद की ओर से दशहरा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। आयोजन का आगाज 15 अक्टूबर से रामलीला मैदान में रामलीला के मंचन से हो गया। वहीं अंतिम दिन 24 अक्टूबर को विजयदशमी पर रावण, कुम्भकरण और मेघनाद के पुतलों का दहन और संतरंगी अतिशबाजी मुख्य आकर्षण रहेंगी। पुतलों के निर्माण और आतिशबाजी के लिए नगर परिषद ने मुरैना से रावण के पुतला बनाने में सिद्धहस्त अजीज खां और गोपाल महावर को बुलाया है। जिनके निर्देशन में सात सदस्यीय कारीगरों की टीम 61 फीट ऊंचे रावण, 51 फीट ऊंचे कुम्भकरण और 41 फीट के मेघनाथ के पुतलों को तैयार करने में जुटी है। अजीज खां ने बताया कि नवरात्र से एक सप्ताह पहले पुतलों के बनाने के कार्य शुरू करने से करीब 20 अक्टूबर तक तीनों के पुतले साज-सज्जा के साथ बन कर तैयार हो जाएंगे।
8 क्विंटल वजनी होगा रावण का पुतला
दशहरे पर दहन होने वाले रावण का पुतला 61 फीट ऊंचा होने के साथ भारी भरकम भी होगा। जिसे हाइड्रोलिक क्रेनों से दहन स्थल पर खड़ा किया जाएगा।
मुख्य कारीगर अजीज खान ने बताया कि बल्लियों व बांसों के साथ कागज, जूट व आतिशबाजी से पुतले तैयार किए जा रहे हैं। ऐसे में करीब 8 क्विंटल वजन का रावण का पुतला बनकर तैयार होगा। वहीं कुम्भकरण और और मेघनाद के 5-5 क्विंटल वजन के पुतले बनेंगे।
ढाई दशक से बना रहे हैं पुतले
अजीज खान व गोपाल महावर ने बताया कि वे ढाई दशक से पुतला बनाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने राजस्थान, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों के शहरों में दशहरा मेला के पुतलों का निर्माण किया है। वे देश में ख्यात कोटा दशहरा मेला में भी रावण का पुतला बना चुके हैं।

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