प्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू में अर्बुदा देवी का मंदिर अधर देवी शक्तिपीठ के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। मान्यता है कि इस स्थान पर मां पार्वती के होठ गिरे थे। मां अर्बुदा देवी की पूजा माता कात्यायनी देवी के स्वरूप में की जाती है। अर्बुदा देवी मां कात्यायनी का ही स्वरूप माना जाता है। मां अर्बुदा देवी का मंदिर माउंट आबू से 3 किमी दूर एक पहाड़ी पर स्थित है। यह मंदिर अर्बुदा देवी और अधर देवी के नाम से प्रसिद्ध है। इस मंदिर की स्थापना साढ़े पांच हजार वर्ष पूर्व हुई थी। नवरात्रि में अष्टमी की रात्रि को यहां महायज्ञ होता है, जो नवमी के सुबह तक पूर्ण होता है। नवरात्रों में यहां निरंतर दिन-रात अखंड़ पाठ होता है। भक्तजन मंदिर में सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा के पश्चात 365 सीढ़ियों को चढकऱ मां के दर्शनों के लिए आते हैं। नवरात्रि को लेकर मंदिर में विशेष तैयारियां की गई है। यहां पूजा अर्चना के साथ ही धार्मिक अनुष्ठान शुरू होंगे।
बासकली राक्षस का वध कर देवताओं को दी थी राहत
पौराणिक मान्यता के अनुसार नवरात्र के दिनों में माता के दर्शन मात्र से व्यक्ति को प्रत्येक दुखों से मुक्ति मिल जाती है और भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। नवरात्रों में यहां बड़ी संख्या में भक्त मां के दर्शनों के लिए आते हैं। नवरात्र के छठे दिन मां अर्बुदा अर्थात माता कात्यायनी के दर्शनों के लिए यहां भक्तों की सुबह से ही भीड़ जमा हो जाती है। यहां पर अर्बुदा देवी का चरण पादुका मंदिर भी स्थित है। माता के चरण पादुका के नीचे उन्होंने बासकली राक्षस का संहार किया था। मां कात्यायनी के बासकली वध की कथा पुराणों में मिलती है। दैत्य राजा कली जिसको बासकली के नाम से जाना जाता था। उसने हजारों वर्ष तप करके भोलेनाथ को प्रसन्न कर उनसे अजेय होने का वर प्राप्त किया था। बासलकी वरदान प्राप्त कर घमंडी हो गया था। उसने देवलोक में इंद्र सहित सभी देवताओं को कब्जे में कर लिया। देवता उसके आतंक से दुखी होकर जंगलों में छिप गए। देवताओं ने कई वर्षों तक तप करके मां अर्बुदा देवी को प्रसन्न किया। माता ने प्रसन्न होकर तीन स्वरूपों में दर्शन दिया। देवताओं ने माता से बासकली से मुक्ति दिलाने का वर मांगा। मां ने उन्हें तथास्तु कहा। माता ने बासकली राक्षस को अपने चरणों से दबा कर उसे मुक्ति प्रदान की। उसके पश्चात यहा मां के चरण पादुका की पूजा होने लगी। स्कंद पुराण में अर्बुद खंड में माता के चरण पादुका की महिमा है। कहा जाता है कि मां के चरण पादुका के दर्शन मात्र से ही मोक्ष की प्राप्ति होती है।
