दीपोत्सव दहलीज पर होने के साथ ही इसकी तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। पांच दिवसीय महापर्व के दौरान घर की देहरी-दीवारों को मिट्टी के दीपक रोशन होंगे। कारीगर घूमते चाक पर मिट्टी के छोटे-बड़े दीपक बनाने में जुट गए हैं। कुम्हार मोहल्ला सहित कई स्थानों पर कामकाज जारी है।
गत कुछ सालों से चाइनीज लाइट के बाजार में हर कहीं आ जाने से से दीपक निर्माण में कमी देखी जा रही थी। कई साल तक चाइनीज लड़ी-लाइट-स्टिक का बाजारों पर कब्जा रहा। उद्यमिता-कौशल विकास और कई संस्थानों के प्रोत्साहन के साथ ही लोगों की सोच में भी आए बदलाव से धीरे-धीरे मिट्टी के दीपक फिर से पसंद बन रहे हैं। युवा कारीगर गोविंद और राहुल ने बताया कि रोजाना तकरीबन 2 से 5 हजार दीपक तैयार कर रहे हैं। नवरात्र के अलावा विजयदशमी से इन्हें बिक्री के लिए बाजारों में भेजा जाएगा।
नवम्बर में होगी सर्वाधिक मांग
नवम्बर में दिवाली पर्व से पहले दीपक की सर्वाधिक मांग रहती है। कारीगर समय रहते हर साइज के दीपक बनाने में जुटे हैं। काली मिट्टी के दीपक बनाकर धूप में सुखाने के अलावा अलाव में पकाया जा रहा है। पारंपरिक चाक के अलावा कई लोगों ने मशीन भी लगाई हैं।
डिजाइनदार दीपक
मिट्टी के साधारण दीपक के अलावा डिजाइनदार दीपक भी बाजारों में उपलब्ध होंगे। इनकी कीमत फिलहाल 20 से 40 रुपए तक है। यह दीपक कोलकाता की मिट्टी से निर्मित हैं। कई कारोबारियों ने 10 से 25 बत्ती वाले दीपक भी मंगवाए हैं।
