सुनेल कस्बे के समीप आकोदिया मार्ग पर वर्षों से चली आ रही परम्परा के तहत रविवार दोपहर करीब साढ़े 12 बजे लालबाई माता थानक पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। भक्ति व श्रद्घा से सराबोर लोगों ने माताजी की सवारी के धधकते अंगारों पर नंगे पैर चलने के दर्शन किए।
माताजी के सवारी के घोड़ले दोपहर साढ़े 12 बजे लालबाई माताजी के थानक से ढोल के ेसाथ लालबाई माताजी, दूधाखेड़ी माताजी, कालका माताजी के घोड़ले एक हाथ में नंगी तलवार व दूसरें में खप्पर लिए हुए थे। घोड़ले की पूजा व आरती की गई। दोपहर करीब साढ़े 12 बजे लालबाई माताजी के थानक पर वहां बने चबूतरे पर सवा नो हाथ लम्बी व सवा हाथ चौड़ी घूणी में धधकते अंगारों व आग की लपटों पर लालबाई माताजी, दूधाखेड़ी माताजी और कालका माताजी के घोड़ले जैसे ही धधकते अंगारों (चूल) से निकले तो श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाए।
चांमुडा माता मंदिर पर आयोजन आज
कस्बे के बस स्टैण्ड स्थित चांमुडा माता मंदिर पर शारदीय नवरात्र पर सोमवार दोपहर करीब साढ़े 12 बजे धधकते अंगारों पर नंगे पैर चलकर माताजी के सवारियां के घोड़लें निकलेंगे। इसमें चांमुडा माताजी, लालाबाई माताजी और दुर्गाखेड़ी माताजी के घोड़ले धधकते अंगारों (चूल) से निकलेंगे।
