कभी शहर की शान-ओ-शौकत के साथ देश-दुनिया में डीग को ख्याति दिलाने वाले यहां के जलमहलों के तालाब अब सीवर टैंक बन गए हैं। प्रदूषण से आमजन ही नहीं, जीव-जंतु भी प्रभावित हो रहे हैं। लेकिन प्रशासन इनकी सुध नहीं ले रहा है।
जलमहलों की नगरी को जिन दोनों तालाबों (रूपसागर, गोपाल सागर) के नाम से देशभर में पहचान मिली है। आज वो अपनी ही दुर्दशा व बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। जहां दोनों तालाबों में पानी का स्तर बहुत नीचे चला गया है, वहीं दोनों तालाबों के गंदे पानी से उठने वाली दुर्गंध व गंदगी की गंध पर्यटकों के साथ आमजन को प्रभावित कर रही है।
शहर में सीवर लाइन के नहीं होने से शहर के तालाबों में नालियों का गंदा पानी जा रहा है, जिसके चलते पानी प्रदूषित हो रहा है। वहीं नगर के लोग इसी प्रदूषित पानी के किनारे से निकलने के लिए मजबूर हो रहे हैं। शहर में वैसे तो कई तालाब हैं। लेकिन जलमहलों के तालाबों में नालियों का गंदा पानी जा रहा है। लेकिन दुर्भाग्यवश इन्हीं तालाबों में गटर के पानी के जाने से शहर की शोभा बढ़ाने वाले इन तालाबों की स्थिति दयनीय हो गई है। हालात चिंताजनक है।
जिम्मेदार नहीं जागे तो मिट जाएगा अस्तित्व
शहर के जलमहलों के रूप सागर व गोपाल सागर पर बड़ी मात्रा में गंदगी है। सही तरीके से गहरीकरण नहीं होने और प्रशासन की अनदेखी के कारण यहां पर नाम मात्र का पानी ही बचा है। तालाबों में बडे पैमाने में फेंके जा रहे कूड़ा कचरा और नालियों का पानी जाने से दिन प्रतिदिन तालाबों का अस्तित्व सिमटता जा रहा है। कूड़ा कचरा और नालियों का पानी ही नहीं, घरों से निकलने वाला सीवरेज-गटर तक पानी इन तालाबों में बदस्तूर जा रहा है। वहीं आसपास के रहने वाले लोगों की ओर से भी कचरे को तालाबों में ही फैंका जा रहा है। यही रूप सागर का है।
सामाजिक संस्थानों-समाज सेवियों ने किए थे प्रयास
जलमहलों के यह तालाब कभी शहर की शोभा बढ़ाते थे, लेकिन आज यहां पर लोग कुछ देर रुकना भी पंसद नहीं कर रहे हैं। नालियों का पानी यहां पर डालने और कचरा फैंकने से तालाब पूरी तरह से दूषित हो चुके हैं। शहर के एतिहासिक तालाबों की दुर्दशा को देख कुछ समाजसेवियों की ओर से तालाबों की साफ-सफाई करने का बीडा उठाया और बड़ी मात्रा में गंदगी और कचरा निकाला गया। लेकिन अब फिर से हालात जस के जस होते रहे हैं। वहीं अब दिनों दिन तालाबों के हालात बिगड़ते जा रहें है।
