Thu, 08 06, 2026
देश

बालाजी की एक झलक पाने को बढ़ रहा है श्रद्धा का कारवां:

हरियाणा और पंजाब से पैदल आ रहे हैं श्रद्धालुओं जत्थे

post-img

कोई नंगे पांव तो किसी के चेहरे पर श्रद्धा का भाव। मन में केवल बालाजी की एक झलक पाने की आश। सिद्धपीठ सालासर धाम के आश्विन पूर्णिमा पर भरने वाले लक्खी मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी है। नवरात्र का अंतिम चरण आने के साथ ही हरियाणा, पंजाब और दिल्ली सहित जिले के ग्रामीण क्षेत्रों से सालासर बालाजी धाम की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं का कारवां पदयात्रा करते हुए आगे बढ़ रहा हैं। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता सेवा शिविरों में जुट गए हैं। हरियाणा के हिसार, सिरसा, रोहतक, अंबाला, रेवाड़ी, गुड़गांव तथा पंजाब के डबवाली सीमा क्षेत्र के शहर और गांवों से पदयात्रियों के जत्थे आने के कारण सड़कों पर दिन रात रौनक रहने लगी है।
बच्चों से लेकर वरिष्ठजन तक में श्रद्धा का भाव
दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले पद यात्रियों में बच्चों से लेकर वरिष्ठजन तक नजर आते हैं। मातृ शक्ति भी पद यात्रा करते हुए बालाजी के दर्शनार्थ जाने में पीछे नहीं हैं। समूह के अलावा अपने अपने हिसाब से भी पैदल यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या कम नहीं होती है। सभी आयु वर्ग के लोग के दल में भक्ति का बल नजर आ रहा है।
पहले साइकिल यात्रा का रहता था दौर
डेढ़ दशक पूर्व तक निकटवर्ती राज्यों से पद यात्रियों की बजाय साइकिल यात्रा कर श्रद्धालु सालासर आया करते थे। मुख्य ठहराव वाले स्थानों पर सेवा शिविर शिविर लगाए जाते थे। मंदिर और धर्मशालाओं में भी शिविर लगाए जाते थे। यह शिविर मेला समाप्ती के बाद भी लगे रहते थे। वजह थी कि साइकिल यात्रियों की घर वापसी भी साइकिल से करनी होती थी। इसलिए सेवा शिविर मेला संपन्न होने के दो दिन बाद तक चलते थे।
छह सौ किलोमीटर तक पदयात्रा कर पहुंच रहे है यात्री
कई पदयात्री छह सौ किलोमीटर की पद यात्रा कर सालासर पहुंच रहे हैं। अंबाला, डबवाली पंजाब के कई जत्थे सालासर पहुंच चुके हैं। कुछ रास्ते में हैं। ऐसे में हरियाणा से सालासर तक सेवा शिविरों की शृंखला बन गई है। सामाजिक संस्थाओं, समाजसेवियों की ओर लगाए गए इन शिविरों में सेवा का जज्बा और सालासर पद यात्रियों की मनुहार भारतीय सनातन संस्कृति के एक परिवार जैसी झांकी प्रदर्शित कर रही है।

Related Post