ना ने सभी को झकझोर दिया। दादी के बारहवें संस्कार वाले दिन उनके 40 वर्षीय पोते का शव घर पहुंचने से परिवार में कोहराम मच गया। मृतक राजेश मेघवाल पिछले 16 वर्षों से सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक में संविदा पर सहायक कर्मचारी के रूप में कार्यरत था। परिजनों का आरोप है कि नौकरी से हटाए जाने के बाद वह गहरे मानसिक तनाव में चला गया था।
तबीयत बिगड़ने पर जोधपुर रेफर, इलाज के दौरान मौत
जानकारी के अनुसार वाल्मीकि कॉलोनी निवासी राजेश मेघवाल (40) की 29 जुलाई को अचानक तबीयत बिगड़ गई। परिजन उन्हें पहले जैसलमेर के जवाहिर अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने जोधपुर रेफर कर दिया। जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल में उपचार के दौरान गुरुवार सुबह उनकी मौत हो गई।
27 जुलाई को गई नौकरी, परिवार ने लगाया मानसिक तनाव का आरोप
परिजनों के अनुसार सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक प्रबंधन ने 27 जुलाई को 11 संविदा कर्मचारियों को सेवा से हटा दिया था, जिनमें राजेश मेघवाल भी शामिल थे। 28 जुलाई को राजेश ने बैंक अधिकारियों से नौकरी जारी रखने की गुहार लगाई, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। परिजनों का कहना है कि नौकरी छूटने के बाद राजेश गहरे तनाव में आ गए थे और उन्होंने खाना-पीना भी छोड़ दिया था।
बैंक के बाहर शव रखकर किया प्रदर्शन
राजेश की मौत के बाद आक्रोशित परिजन शव को लेकर सीधे सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक पहुंचे और बैंक प्रबंधन तथा प्रबंध निदेशक (एमडी) के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बैंक प्रशासन ने पक्षपात करते हुए अपने चहेते संविदा कर्मचारियों को बचा लिया, जबकि वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया।
दादी के बारहवें दिन पोते की अर्थी उठी
परिजनों ने बताया कि राजेश की दादी का 12 दिन पहले निधन हुआ था और गुरुवार को उनका बारहवां संस्कार था। उसी दिन राजेश का शव घर पहुंचने से पूरे परिवार में मातम छा गया। राजेश अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनके पीछे माता-पिता, पत्नी और 14 व 8 वर्ष के दो बेटे हैं।
न्याय और कार्रवाई की मांग
परिजन बैंक प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षों तक सेवा देने वाले कर्मचारियों के साथ अन्याय हुआ है और दोषी अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए।
