गुरूकुल..वैदिक और आध्यात्मिक शिक्षा पद्दति का बोध करवाने वाला नाम है। बदलती शिक्षा पद्धति में शेखावाटी अंचल के अधिकांश गुरूकुल बंद हो चुके हैं, लेकिन चूरू शहर में पिछले 101 वर्ष से ऋषिकुल ब्रह्मचर्य आश्रम अडिग खड़ा है। यह आश्रम संस्कृत और संस्कृति के साथ हर विषय की शिक्षा छात्रों को दे रहा है। इस ज्ञान विज्ञान के केंद्र ऋषिकुल ब्रह्मचर्य आश्रम की स्थापना एक सौ एक वर्ष पूर्व यहां के सेठ जयदयाल गोयनका ने रखी थी। अब तो यह सम्पूर्णानंद विश्वविद्यालय से संम्बद्धता प्राप्त स्कूल बन गया है। यहां पर छात्र स्नातक तक शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं।
समय के साथ किए बदलाव
चूरू के एक मात्र वैदिक स्कूल ऋषिकुल ब्रह्मचर्य आश्रम की स्थापना भारतवर्ष गुुरुकुल प्रणाली शिक्षा के आधार पर की गई थी, लेकिन बदलते समय के साथ यहां शिक्षा के बदलाव के साथ आत्मसात किया। छात्रों ने यहां संस्कृत, साहित्य, सामाजिक ज्ञान, विज्ञान व गणित विषयों की स्कूली शिक्षा भी दी जा रही है। वेदों के ज्ञान, संस्कृत, हिन्दी के अलावा अग्रेजी भी यहां विषय है। इन विषयों के कारण यहां अध्ययन करनेवाले विद्यार्थियों को उच्च माध्यमिक और महाविद्यालयों में अध्ययन किया।
दसवीं से 12 वीं तक हुआ आश्रम
प्रारंभिक से माध्यमिक और फिर दसवीं तक और गत वर्ष यह वैदिक विद्यालय 12 वीं तक कर दिया गया है। आश्रम में रहनेवाले उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थी आज वैदिक ज्ञान के साथ अपनी इच्छा अनुसार जिस पर भी विषय में चाहे उसमें वे अध्ययन कर सकते हैं। वर्तमान में यहां करीब एक सौ विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं।
रहने खाने की व्यवस्था
आश्रम में अध्ययन करनेवाले विद्यार्थियों के रहने व भोजन आदि की सभी व्यवस्थाएं हैं। सामान्य शुल्क के बावजूद भी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाने वाले इस आश्रम में विषय अध्यापक अध्ययन करवा रहे हैं। आज के भौतिक युग में भले ही इस स्कूल का ड्रेस कोड नहीं बदला हो, लेकिन आधुनिक शिक्षा के साथ यह स्कूल माकूल व्यवस्था के साथ शैक्षिक जगत का सशक्त प्रतिनिधित्व कर रहा है।
विभिन्न व्यवस्थाओं से सुसज्जित
डिजिटल युग और संचार क्रांति के समय में इस वैदिक स्कूल में सभागार से लेकर पुस्तकालय तक व्यवस्थाएं सुसज्जित है। कक्षा कक्ष, प्राथमिक चिकित्सा और जलपान गृह के साथ-साथ बड़ा खेल मैदान भी है। एकदम साफ सुथरा मैदान, पेड़ों की शीतल छाया तो यहां से गुजरनेवाले लोगों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है।
भवन का हो रहा है सर्वांगीण विकास
इस वैदिक स्कूल के पुराने भवन में आमूल-चूल परिर्वतन कर इसे नवस्वरूप प्रदान किया गया है। हालांकि पुराना भवन शैक्षिक व्यवस्थाओं के सृजन की दृष्टि से कम नहीं रहा, लेकिन वर्तमान मे स्कूल के प्रवेश द्वार से लेकर नए कमरों का निर्माण किया गया है। इससे पूर्व भी बनाया गए सभा भवन की वास्तु कला और दीवारों पर लिखे गए भिति चित्रांकित राम चरित मानस की चौपाइयां आकर्षित करती है।
छात्रों की कमी बन रही है परेशानी
सेठ जयदयाल गोयनका का एक इसे विश्वविद्यालय बनाने का सपना रहा। वर्तमान में इसकी व्यवस्था देख रहे संचालक मण्डल ने गत वर्ष इस विद्यालय को सम्पूर्णानंद विश्वविद्यालय वाराणसी से जोड़ दिया। जिससे यहां अध्ययन करनेवाले विद्यार्थी अब स्नातक और स्नातकोत्तर शिक्षा वाराणसी के सम्पूर्णनंद संस्कृत विश्वविद्यालय में प्राप्त कर सकते हैं। चूरू में छात्रों की कमी परेशानी बनी है। यहां भी छात्र संख्या बढ़ने पर इसे महाविद्यालय बनाया जाएगा।
शिक्षा परिषद लखनऊ से जुड़ाव
प्राचार्य ईश्वरसिंह ने बताया कि वैदिक स्कूल ऋषिकुल ब्रह्मचर्य आश्रम देव भाषा संस्कृत, वेद और व्याकरण के साथ-साथ तीसरी कक्षा से विद्यार्थियों को सामान्य ज्ञान से दीक्षित करता है। सम्पूर्णनंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी से सम्बद्ध और माध्यमिक शिक्षा परिषद लखनऊ से यह स्कूल जुड़ा हुआ है। विश्वविद्यालय से परीक्षा देनेवाले विद्यार्थियों का यह परीक्षा केन्द्र भी है। यहां शिक्षा प्राप्त करनेवाला विद्यार्थी अध्ययन पूर्ण करने के बाद कही भी प्रवेश ले सकता है। यहां संस्कृत व्याकरण, सामाजिक ज्ञान, विज्ञान, साहित्य, दर्शन, गणित आदि विषय में विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं।
