Thu, 08 06, 2026
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राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में तैनात होंगी ‘प्रसव सखी’, गर्भवती महिलाओं को मिलेगी हर कदम पर मदद:

हाईरिस्क प्रेग्नेंसी की निगरानी होगी मजबूत, अस्पतालों में बनेंगे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य हेल्प डेस्क

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जयपुर। राजस्थान सरकार सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए ‘प्रसव सखी’ तैनात करने की तैयारी कर रही है। प्रसव सखी गर्भवती महिला के अस्पताल में भर्ती होने से लेकर डिस्चार्ज होने तक हर प्रक्रिया में समन्वय (कोऑर्डिनेशन) का काम करेगी। इसके साथ ही अस्पतालों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य हेल्प डेस्क भी स्थापित किए जाएंगे।

हाल ही में कोटा, जोधपुर, बीकानेर, भीलवाड़ा, बांसवाड़ा सहित कई जिलों में 17 से अधिक गर्भवती महिलाओं की मौत और किडनी फेल होने के मामलों के बाद सरकार ने हाईरिस्क प्रेग्नेंसी मामलों की निगरानी को लेकर यह पहल शुरू की है।

प्रसव सखी निभाएगी अहम भूमिका

प्रसव सखी गर्भवती महिलाओं को अस्पताल में रजिस्ट्रेशन, जांच, सोनोग्राफी, ब्लड बैंक से समन्वय, ऑपरेशन या सामान्य प्रसव की प्रक्रिया के दौरान आवश्यक मार्गदर्शन और सहायता उपलब्ध कराएगी। इसके अलावा प्रसव के बाद मां और नवजात को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं, टीकाकरण और अन्य योजनाओं से जोड़ने में भी सहयोग करेगी।

हाईरिस्क प्रेग्नेंसी और एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं की विशेष निगरानी तथा आपातकालीन स्थिति में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय भी प्रसव सखी की जिम्मेदारी होगी।

डॉक्टर का काम नहीं करेगी प्रसव सखी

स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रसव सखी केवल सहायता और समन्वय का कार्य करेगी। वह किसी भी प्रकार की दवा नहीं लिखेगी, इलाज नहीं करेगी, सामान्य या सिजेरियन डिलीवरी का निर्णय नहीं लेगी और जांच रिपोर्ट की व्याख्या भी नहीं करेगी। चिकित्सा संबंधी सभी निर्णय डॉक्टर ही लेंगे।

अस्पतालों में बनेंगे हेल्प डेस्क

सरकार प्रत्येक चिन्हित सरकारी अस्पताल में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य हेल्प डेस्क स्थापित करेगी। यह हेल्प डेस्क गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों के लिए पहला संपर्क केंद्र होगा। यहां रजिस्ट्रेशन, आवश्यक जानकारी, मार्गदर्शन और शिकायतों के समाधान में सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

37 हजार से अधिक हाईरिस्क गर्भवतियों की होगी निगरानी

राजस्थान में वर्तमान में 37 हजार से अधिक हाईरिस्क प्रेग्नेंसी के मामले चिन्हित हैं। इनमें सीकर, जयपुर, चूरू, कोटा, बीकानेर, बांसवाड़ा, भीलवाड़ा, उदयपुर और झुंझुनूं जैसे जिले प्रमुख हैं।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक हाईरिस्क गर्भवती महिला की नामवार सूची तैयार कर उसकी नियमित निगरानी की जाए। इसके लिए आशा कार्यकर्ता, एएनएम, सीएचओ, मेडिकल ऑफिसर और एम्बुलेंस सेवाओं की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी, ताकि जरूरत पड़ने पर समय पर रेफरल और उपचार सुनिश्चित हो सके।

रैफरल सिस्टम को किया जाएगा मजबूत

स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि प्रत्येक हाईरिस्क गर्भवती महिला की स्थिति के अनुसार अलग-अलग रणनीति अपनाई जा रही है। राज्य सरकार का मुख्य फोकस रैफरल सिस्टम को मजबूत करने और समय पर इलाज सुनिश्चित करने पर है, ताकि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सके।

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